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सारिस्का टाइगर रिजर्व
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Home राजस्थान सारिस्का टाइगर रिजर्व
वन्यजीव अभयारण्य

सारिस्का टाइगर रिजर्व

★★★★★ 4.4 (362 रिवीव)
📍 • अलवर• राजस्थान
📍 दिशा प्राप्त करें
🕒
खुलने का समय

सुबह की सफारी: सुबह 6:00 बजे से 10:00 बजे तक शाम की सफारी: दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक

💰
प्रवेश शुल्क

₹₹80–₹100 विदेशी: ₹470+ जीप सफारी (प्रति जीप): ₹2,500–₹3,500

🌤️
घूमने का सर्वोत्तम समय

अक्टूबर से मार्च

समय अवधि

4 से 6 घंटे

🅿️
पार्किंग

Available

👨‍👩‍👧‍👦
परिवार के लिए उपयुक्त

हाँ

सारिस्का टाइगर रिजर्व

सारिस्का टाइगर रिजर्व राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध वन्यजीव स्थलों में से एक है, जो अलवर जिले की अरावली पहाड़ियों में स्थित है। लगभग 881 वर्ग किलोमीटर में फैला यह रिजर्व बेंगल बाघ, तेंदुए, धारीदार हाइना, सांभर हिरण, नीलगाय और कई पक्षियों की प्रजातियों का घर है। कभी यह शाही शिकार का मैदान था, सारिस्का को 1978 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। इसकी समृद्ध जैव विविधता, सुंदर परिदृश्य, प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक स्मारक इसे वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य बनाते हैं।

सरिस्का टाइगर रिज़र्व राजस्थान के अलवर जिले में स्थित एक प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्य है। प्राचीन अरावली पहाड़ियों में बसा यह रिज़र्व लगभग 881 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और अपनी समृद्ध जैव विविधता, खूबसूरत दृश्य और सफल बाघ संरक्षण प्रयासों के लिए जाना जाता है। मूल रूप से यह अलवर की शाही परिवार के लिए शिकार का रिज़र्व था, लेकिन बाद में इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया और 1978 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत बाघ रिज़र्व बना दिया गया।

सरिस्का की भौगोलिक संरचना में शुष्क पर्णपाती जंगल, झाड़ी क्षेत्र, चट्टानी पहाड़, घास के मैदान और मौसमी नदियां शामिल हैं। यह विविध इलाके विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों के लिए अनुकूल आवास प्रदान करते हैं। यह रिज़र्व खासकर बंगाल टाइगर्स के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें स्थानीय बाघ आबादी के शिकार के कारण लुप्त होने के बाद पुनः लाया गया। आज, सरिस्का भारत में सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन और संरक्षण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
बाघों के अलावा, यहाँ आने वाले आगंतुक तेंदुए, जंगल के बिल्ली, धारीदार लकड़बघ्घा, सुनहरे शियाल, जंगली सूअर, सांबर हिरण, चीतल, नीलगाय, लंगूर और रेसस बंदरों को देख सकते हैं। पक्षी प्रेमी पूरे वर्ष विभिन्न निवासी और प्रवासी पक्षियों को देख कर आनंद ले सकते हैं।

सारित्का रोमांचक जीप और कैंटर सफारी की पेशकश करता है, जो पर्यटकों को इसकी प्राकृतिक सुंदरता का पता लगाने और जंगली जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का मौका देती है। आरक्षित क्षेत्र में कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी हैं, जिनमें कंकवाड़ी किला शामिल है, जहाँ मुगल शाहीसाब दारा शिकोह को कभी कैद किया गया था, और प्रतिष्ठित पाण्डुपोल हनुमान मंदिर, जो महाभारत की कथाओं से जुड़ा है।

सारित्का टाइगर रिज़र्व घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच है, जब मौसम सुखद होता है और वन्यजीवों को देखना आसान होता है। रोमांच, संरक्षण, इतिहास और अध्यात्म का मिश्रण पेश करते हुए, सारिस्का राजस्थान आने वाले प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों, शोधकर्ताओं और वन्यजीव उत्साही लोगों के लिए यादगार अनुभव देता है।

📜 इतिहास

सरिस्का टाइगर रिजर्व का इतिहास केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की शाही विरासत से भी जुड़ा हुआ है। पुराने समय में यह क्षेत्र अलवर रियासत के महाराजाओं का शिकारगाह हुआ करता था। राजा-महाराजा और ब्रिटिश अधिकारी यहाँ शिकार करने आया करते थे, क्योंकि उस समय शिकार को शान और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था। भारत की आज़ादी के बाद वन्यजीव संरक्षण पर ध्यान दिया गया और शिकार पर रोक लगा दी गई। वर्ष 1955 में इस क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया। इसके बाद 1978 में सरिस्का को भारत सरकार की प्रोजेक्ट टाइगर योजना में शामिल किया गया, जिसका उद्देश्य देश में घटती बाघों की संख्या को बचाना था।

लेकिन वर्ष 2004 में एक बड़ी घटना सामने आई, जब पता चला कि सरिस्का के सभी बाघ अवैध शिकार के कारण खत्म हो चुके हैं। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। स्थिति को सुधारने के लिए वर्ष 2008 में रणथंभौर टाइगर रिजर्व से बाघों को लाकर सरिस्का में बसाया गया। यह भारत का पहला सफल टाइगर पुनर्वास (Tiger Relocation) अभियान माना जाता है। आज सरिस्का फिर से बाघों की सुरक्षित शरणस्थली बन चुका है और वन्यजीव संरक्षण की एक सफल मिसाल के रूप में जाना जाता है।

यहाँ क्यों जाएँ सारिस्का टाइगर रिजर्व?

जानिए यह स्थान यात्रियों की पहली पसंद क्यों है।

सारिस्का टाइगर रिजर्व
1

🍛 दाल बाटी चूरमा

दाल बाटी चूरमा राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक भोजन है। घी में डूबी कुरकुरी बाटी, मसालेदार दाल और मीठे चूरमे के साथ परोसी जाती है। इसका स्वाद हर पर्यटक को पसंद आता है।

2

🍛 लाल मांस

लाल मांस राजस्थान की प्रसिद्ध मसालेदार मटन करी है। इसे लाल मिर्च, दही और पारंपरिक मसालों से बनाया जाता है। इसे बाजरे की रोटी या नान के साथ खाया जाता है।

3

🍛 गट्टे की सब्जी

बेसन के गट्टों को दही और मसालों की ग्रेवी में पकाकर बनाई जाने वाली यह लोकप्रिय राजस्थानी सब्जी शाकाहारी लोगों की पसंदीदा डिश है।

4

🍛 केर सांगरी

केर और सांगरी राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में मिलने वाली पारंपरिक सामग्री हैं। इन्हें मसालों के साथ पकाकर स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है, जिसे रोटी या बाजरे की रोटी के साथ खाया जाता है।

🦁

जंगल सफारी

मार्गदर्शक के साथ जंगल सफारी का आनंद लें और वन्यजीवों को देखें। वन्यजीवों को परेशान न करें तथा अभयारण्य के नियमों का पालन करें।

🦜

पक्षी दर्शन

प्राकृतिक वातावरण में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का अवलोकन करें। बेहतर अनुभव के लिए दूरबीन साथ रखें और शांति बनाए रखें।

📸

वन्यजीव फोटोग्राफी

वन्यजीवों और प्राकृतिक दृश्यों की शानदार तस्वीरें लें। जानवरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और उन्हें परेशान न करें।

🚶

प्राकृतिक सैर

निर्धारित प्राकृतिक मार्गों पर जंगल की सैर का आनंद लें। ताज़ी हवा के साथ वन की जैव विविधता को करीब से जानें।

🏕️

कैंपिंग

प्रकृति के बीच अनुमति प्राप्त स्थानों पर कैंपिंग का आनंद लें। पर्यावरण की सुरक्षा करें और स्वच्छता बनाए रखें।

🚙

जीप सफारी

विशेषज्ञ गाइड के साथ रोमांचक जीप सफारी का अनुभव करें। सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए वन्यजीवों को देखें।

🐘

हाथी सफारी

जहाँ उपलब्ध हो वहाँ हाथी सफारी का अनूठा अनुभव लें। वन्यजीवों का सम्मान करें और पशु कल्याण के नियमों का पालन करें।

📖

वन्यजीवों के बारे में जानें

वन्यजीवों, जैव विविधता और संरक्षण के बारे में जानकारी प्राप्त करें। प्राकृतिक आवासों के महत्व और संरक्षण को समझें।

🌿

ईको पर्यटन

प्रकृति के संरक्षण के साथ ईको पर्यटन का आनंद लें। जिम्मेदार पर्यटन अपनाकर जंगल और वन्यजीवों की रक्षा में सहयोग करें।

यात्रा सुझाव एवं आवश्यक जानकारी

यात्रा से पहले जानने योग्य बातें सारिस्का टाइगर रिजर्व.

🌤

घूमने का सर्वोत्तम समय

अक्टूबर से मार्च

👕

क्या पहनें

आरामदायक कपड़े और चलने के जूते पहनें। सर्दियों की सुबह में हल्की जैकेट साथ ले जाएँ।.

📷

फोटोग्राफी

सूर्योदय और सूर्यास्त सुंदर तस्वीरों के लिए सबसे अच्छी रोशनी देते हैं।

🍴

स्थानीय भोजन

असली क्षेत्रीय खाने का मज़ा लेने के लिए पास के स्थानीय रेस्टोरेंट्स में जाकर देखो।

🛡️

सुरक्षा सुझाव

अपनी चीज़ें सुरक्षित रखें और अपनी यात्रा के दौरान स्थानीय नियमों का पालन करें।

🚗

पहुंच सुविधा

यह स्थान सड़कों से पहुँच योग्य है और पास में पार्किंग और सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएँ हैं।

💧

पानी साथ रखें

पानी पीते रहो, खासकर गर्मी में और बाहर घूमते समय।

📍

आसपास उपलब्ध सुविधाएँ

होटल, रेस्टोरंट, एटीएम, फ्यूल स्टेशन और मेडिकल सेवाएँ पास में उपलब्ध हैं।

यात्रा जानकारी

🚗

कैसे पहुँचें

  • 📍हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है (लगभग 110 किमी)।,
  • 📍रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अलवर रेलवे स्टेशन है (लगभग 37 किमी)।,
  • 📍सड़क मार्ग: दिल्ली और जयपुर से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। नियमित बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।
💡

यात्रा सुझाव एवं आवश्यक जानकारी

  • भ्रमण का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च,
  • सफारी पहले से बुक करें (ऑनलाइन या द्वार पर),
  • सुबह जल्दी होने वाली सफारी में बेहतर जंगली जीवन देखा जा सकता है,
  • तटस्थ रंग के कपड़े पहनें और पानी साथ ले जाएँ,
  • वन नियमों का पालन करें और शांति बनाए रखें

यहाँ क्यों जाएँ

  • शानदार बंगाल टाइगर को देखने का अवसर,
  • धनी जैव विविधता जिसमें तेंदुए हियाने लोमड़ी और हिरण शामिल हैं,
  • फोटोग्राफी के लिए आदर्श मनमोहक दृश्य,
  • ऐतिहासिक आकर्षण जैसे कंकवाड़ी किला

विशेषताएँ

  • पहलों में से एक रिजर्व जहाँ बाघों को सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया,
  • वन्यजीव और प्राचीन मंदिरों का अनोखा संयोजन जैसे पांडुपोल हनुमान मंदिर,
  • 200 से अधिक प्रजातियों के साथ समृद्ध पक्षी जीवन,
  • प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक खंडहरों का मिश्रण
गतिविधियाँ

क्या करें

✅ जीप सफारी (सुबह और शाम)
✅ कैंटर सफारी
✅ पक्षी दर्शन
✅ कांकवाड़ी किला देखें
✅ प्राचीन नीलकंठ मंदिर के अवशेषों का अन्वेषण करें
✅ फोटोग्राफी
✅ जंगल के अंदर पांडुपोल मंदिर का दर्शन

वर्तमान मौसम

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अक्सर पूछे जाने वाले

घूमने का सर्वोत्तम समय सारिस्का टाइगर रिजर्व?

अक्टूबर से मार्च

खुलने का समय

सुबह की सफारी: सुबह 6:00 बजे से 10:00 बजे तक शाम की सफारी: दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक

प्रवेश शुल्क

प्रवेश शुल्क ₹₹80–₹100 विदेशी: ₹470+ जीप सफारी (प्रति जीप): ₹2,500–₹3,500 है।

कितना समय लगता है?

4 से 6 घंटे

कैसे पहुँचें सारिस्का टाइगर रिजर्व?

हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है (लगभग 110 किमी)।,
रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अलवर रेलवे स्टेशन है (लगभग 37 किमी)।,
सड़क मार्ग: दिल्ली और जयपुर से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। नियमित बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।

लास्ट अपडेट: 05 July 2026